मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मिलने वाली यूनिफॉर्म की 350 करोड़ रुपए की खरीदी प्रक्रिया पर जबलपुर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश की यूनिफॉर्म खरीदी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मामले में एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
दरअसल, विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म की खरीदी को लेकर पाठ्यपुस्तक निगम ने खुला टेंडर जारी किया था। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ समेत तीन संगठनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम-2023 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। संगठनों का कहना है कि नियमों के तहत राज्य के स्थानीय उपक्रमों और बुनकरों से सीधे खरीदी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिलों से जुड़े करीब 2 लाख बुनकर परिवारों पर पड़ने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, अगर यूनिफॉर्म की खरीदी स्थानीय बुनकरों और सहकारी संस्थाओं के बजाय खुली टेंडर प्रक्रिया के जरिए होती है, तो इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
भंडार क्रय नियम-2023 के तहत हथकरघा बुनकरों, बुनकर समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय सहकारी संस्थाओं से कपड़े और उससे जुड़े उत्पादों की खरीदी का प्रावधान बताया गया है।
अब हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष जानने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है और फिलहाल 350 करोड़ रुपए की यूनिफॉर्म खरीदी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यानी अब सरकार के जवाब और कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। फैसला सिर्फ यूनिफॉर्म की खरीदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे प्रदेश के हजारों बुनकर परिवारों की रोजी-रोटी भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।







