राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को नागपुर में युवाओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश के लिए बड़ा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। अगर इस युवा शक्ति को सही दिशा, शिक्षा और अवसर मिले, तो भारत को इसका बड़ा आर्थिक और सामाजिक लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यही स्थिति समाज के लिए चुनौती बन सकती है।
डेमोग्राफिक डिविडेंड उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी देश में कामकाजी उम्र यानी 15 से 64 वर्ष की आबादी बच्चों और बुजुर्गों की तुलना में अधिक होती है। ऐसी आबादी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
मोहन भागवत ने युवाओं को सिर्फ वर्तमान के बारे में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में भी सोचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज जो युवा देश की ताकत हैं, करीब 30 साल बाद वही उम्रदराज होंगे। इसलिए युवाओं को अपने फैसलों में भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों और समाज की जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
भागवत ने यह भी कहा कि भारत को विकास और प्रगति के मानक किसी दूसरे देश की परिस्थितियों के आधार पर तय नहीं करने चाहिए। भारत की अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियां हैं, इसलिए देश को अपनी जरूरतों के मुताबिक विकास का रास्ता और सफलता के मानक खुद निर्धारित करने चाहिए।
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का संदेश साफ है कि भारत के पास युवा शक्ति के रूप में बड़ी संभावना है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को सही दिशा, बेहतर अवसर और जिम्मेदारी का बोध मिले, ताकि यही जनसंख्या लाभांश भारत की आर्थिक मजबूती और विकसित भविष्य की नींव बन सके।






