मध्य पूर्व में जंग का नौवां दिन… और अब लड़ाई सीधे उस नस पर वार कर रही है जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था चलती है तेल। Israel ने Iran के तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के करीब 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के साथ ही खाड़ी का आसमान धुएं से भर गया है और दुनिया की नजरें उसी सवाल पर टिक गई हैं क्या यह जंग अब सीधे वैश्विक तेल सप्लाई को जला देने वाली है?
उधर Donald Trump ने भी अपने तेवर साफ कर दिए हैं। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले।
उनका संदेश लगभग अल्टीमेटम जैसा था या तो ईरान खुद सरेंडर करे, या उसकी सैन्य ताकत इतनी तोड़ दी जाएगी कि वह लड़ने के काबिल ही न बचे। यानी वॉशिंगटन से साफ संकेत है यह सिर्फ दबाव नहीं, घुटनों पर लाने की रणनीति है।
ईरान की दहाड़: खाड़ी में आए तो जहाज डुबो देंगे
लेकिन तेहरान भी झुकने के मूड में नहीं है। Iran की सेना ने अमेरिका को खुली चेतावनी दे दी है अगर अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में दाखिल हुए, तो उन्हें समुद्र की गहराई में दफना दिया जाएगा।ईरान का यह तीखा बयान ऐसे वक्त आया है जब Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि United States की नौसेना जल्द ही तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए फारस की खाड़ी में अपने युद्धपोत भेज सकती है।
ये वही टैंकर हैं जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz से होकर गुजरते हैं। और यहीं से शुरू होता है असली खतरा…
अगर होर्मुज की इस पतली जलधारा में एक भी जहाज डूबा, एक भी मिसाइल चली तो सिर्फ खाड़ी नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है। अब सवाल ये है क्या यह जंग सिर्फ मिसाइलों तक सीमित रहेगी… या फारस की खाड़ी अगली बारूदी रणभूमि बनने वाली है?







