प्रदेश की आर्थिक सेहत को लेकर जारी हुए ताजा आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। हालांकि मध्य प्रदेश अब भी राष्ट्रीय औसत के मुकाबले रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है, लेकिन हालिया श्रम सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने नीति-निर्माताओं के माथे पर बल ला दिए हैं। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान राज्य की औसत बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी से बढ़कर 3.4 फीसदी पर पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी संकेत दे रही है कि प्रदेश के श्रम बाजार में धीरे-धीरे दबाव बढ़ रहा है, जिसे समय रहते संबोधित करना अनिवार्य है।
सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में देखने को मिली है। इस युवा वर्ग में बेरोजगारी का ग्राफ 8.9 फीसदी से उछलकर 9.3 फीसदी तक जा पहुंचा है। आंकड़ों की भाषा में समझें तो प्रदेश का हर दसवां युवा इस समय सक्रिय रूप से काम की तलाश में है। शहरी क्षेत्रों में स्थिति 5.8 फीसदी पर स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक पक्ष है, परंतु ग्रामीण अंचलों में दर का 2.3 से बढ़कर 2.5 फीसदी होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में छिपी चुनौतियों को उजागर करता है।
तुलनात्मक बढ़त में सुरक्षित प्रदेश: राष्ट्रीय आंकड़ों के मुकाबले मध्य प्रदेश का प्रदर्शन अब भी मजबूत
चुनौतियों के बावजूद मध्य प्रदेश रोजगार के मोर्चे पर देश के कई बड़े राज्यों से कहीं बेहतर स्थिति में खड़ा है। जहां एक ओर देश की औसत बेरोजगारी दर 5 फीसदी के आसपास बनी हुई है, वहीं मध्य प्रदेश 3.4 फीसदी के साथ काफी नीचे पायदान पर है। युवाओं के मामले में यह अंतर और भी स्पष्ट दिखाई देता है। राष्ट्रीय स्तर पर 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर जहां 15 फीसदी के डरावने आंकड़े को छू रही है, वहीं मध्य प्रदेश में यह मात्र 9.3 फीसदी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में स्थिरता बनी रहना इस बात का प्रमाण है कि औद्योगिक और सेवा क्षेत्र अभी भी नियुक्तियां कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आई मामूली बढ़त को मौसमी उतार-चढ़ाव या कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, प्रदेश सरकार के लिए यह आंकड़े एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह हैं, ताकि युवाओं के लिए कौशल विकास और ग्रामीण स्वरोजगार की योजनाओं को और अधिक गति दी जा सके।







