देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। रसोई से लेकर बिजली के बिल तक, हर खर्च में इजाफा हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब परिवारों को अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।
भोपाल के सुभाष नगर निवासी सुभाष कीर की कहानी आज हर मध्यम वर्गीय परिवार की हकीकत बन चुकी है। जब वे स्थानीय मंडी में राशन खरीदने पहुंचे, तो बढ़ी हुई कीमतों ने उन्हें चौंका दिया। हालात इतने खराब हैं कि उन्हें अपनी खरीदारी की सूची से कुछ जरूरी सामान तक हटाना पड़ा।
पिछले कुछ समय में खाने के तेल की कीमत में लगभग 40 रुपए प्रति लीटर और घी में करीब 30 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, पहले से बढ़े हुए बिजली और रसोई गैस के दामों ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। इसका सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ा है, जो करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष, का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में बाधा के कारण रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होती जा रही हैं।
नतीजा यह है कि मध्यम वर्ग का परिवार दोहरी मार झेल रहा है एक तरफ अंतरराष्ट्रीय हालात और दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर बढ़ती बिजली और गैस की कीमतें। अब लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है सीमित आय में बढ़ते खर्चों को संभालना।
महंगाई की यह आग कब तक मध्यम वर्ग को झुलसाती रहेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, हर घर का बजट संतुलन बनाने की जद्दोजहद में है।







