मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। जिस सीजफायर से शांति की उम्मीद की जा रही थी, वह अब महज 48 घंटों में टूटता नजर आ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu अब अंतरराष्ट्रीय दबाव को नजरअंदाज कर रहे हैं? यहां तक कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की अपीलों का भी असर दिखाई नहीं दे रहा।
Israel और Lebanon के बीच हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। सीजफायर लागू होने के बावजूद सीमा पर लगातार हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इजराइली सेना ने लेबनान के कई इलाकों में एयरस्ट्राइक तेज कर दी है, जिससे भारी तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल का यह रुख सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक और राजनीतिक कारण भी हैं। लेबनान में सक्रिय संगठन हिज़्बुल्लाह को कमजोर करना इजराइल की प्राथमिकता माना जा रहा है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन Benjamin Netanyahu की सरकार फिलहाल अपने सैन्य अभियान को रोकने के मूड में नहीं दिख रही।
लेबनान में इजराइल की कार्रवाई के पीछे तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं
पहला, सीमा सुरक्षा को मजबूत करना
दूसरा, हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म करना
और तीसरा, घरेलू राजनीतिक दबाव
लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही हैक्या यह संघर्ष अब बड़े युद्ध में बदल सकता है? फिलहाल हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अगर अगले 48 घंटे में हालात नहीं संभले, तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। दुनिया की नजरें अब मध्य पूर्व पर टिकी हैं।







