खाकी एक बार फिर लहूलुहान हुई है, लेकिन इस बार किसी अपराधी की गोली से नहीं, बल्कि अपनों के बीच उपजे तनाव से। छतरपुर जिले के नौगांव बस स्टैंड इलाके में आज सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक बंद पड़ी पुलिस चौकी के भीतर एक कॉन्स्टेबल का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। जिस पुलिस के कंधों पर सुरक्षा का जिम्मा है, उसी का एक जवान सिस्टम के दबाव में टूट गया या मामला कुछ और है?
मृतक की पहचान 35 वर्षीय तरुण गंधर्व के रूप में हुई है, जो सागर के रहने वाले थे और वर्तमान में नौगांव थाने में तैनात थे। विडंबना देखिए, जिस पुरानी और निष्क्रिय चौकी में तरुण ने मौत को गले लगाया, ठीक उसके सामने नई पुलिस चौकी है जहाँ उनके साथी तैनात थे। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे जब लोगों की नजर फंदे पर पड़ी, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
मौके पर पहुंची एफएसएल की टीम और वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। एसडीओपी अमित मेश्राम का कहना है कि प्राथमिक तौर पर यह मामला मानसिक तनाव और आत्महत्या का लग रहा है। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे गुत्थी और उलझ गई है। क्या तरुण किसी निजी परेशानी में थे या ड्यूटी का बोझ उनकी जान पर भारी पड़ गया?
फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस भले ही इसे सुसाइड मान रही हो, लेकिन एक जवान का पुलिस चौकी के भीतर ही ऐसा कदम उठाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों हमारे रक्षक इतने तनाव में हैं कि उन्हें मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आता है? मामले की जांच जारी है, और उम्मीद है कि जल्द ही तरुण की मौत की असल वजह सामने आएगी।







