आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने रोजगार और स्वरोजगार की हकीकत पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी यानी DJAY-S के तहत जब देश के 13 राज्यों के 25 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया, तो सबसे ज्यादा उत्साह मध्य प्रदेश के युवाओं में देखने को मिला।
राज्य के 284 युवाओं ने अपना रोजगार शुरू करने के लिए लोन का आवेदन किया। इनमें गिग वर्कर, निर्माण श्रमिक, वाहन चालक और स्वच्छता कर्मी जैसे मेहनतकश युवा शामिल थे, जो नौकरी की बजाय खुद का काम शुरू करना चाहते थे। लेकिन इन उम्मीदों को बड़ा झटका तब लगा, जब 138 आवेदन सीधे खारिज कर दिए गए।
युवाओं ने कुल 15 करोड़ 83 लाख रुपए से ज्यादा के लोन की मांग की थी, ताकि वे छोटे कारोबार और स्वरोजगार की शुरुआत कर सकें। लेकिन मंजूरी मिली सिर्फ करीब 84 लाख रुपए की। यानी कुल मांग का लगभग 5 प्रतिशत ही स्वीकृत हो सका। ऐसे में बड़ी संख्या में युवा आज भी आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं।
यह आंकड़े सिर्फ लोन की कहानी नहीं बताते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि स्वरोजगार की राह में बैंकिंग प्रक्रिया और सरकारी सिस्टम कितनी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। सवाल यह है कि जब युवा खुद रोजगार पैदा करना चाहते हैं, तब उनकी राह आसान क्यों नहीं बनाई जा रही? अब देखना होगा कि सरकार इन आंकड़ों से क्या सबक लेती है और भविष्य में ऐसे युवाओं को राहत देने के लिए क्या नए कदम उठाए जाते हैं।







