यूपी में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी लखनऊ में महज तीन घंटे की बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और करीब दो फीट तक पानी भरने से गलियां तालाब में तब्दील हो गईं। लोगों को घरों से निकलने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी का पानी बढ़ने से यूपी और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला पुल डूब गया। हालात ऐसे हैं कि पानी अब कॉलोनियों और घरों तक पहुंचने लगा है। गंगा, यमुना और शारदा समेत यूपी की 11 नदियां उफान पर हैं, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
उत्तराखंड में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। टिहरी डैम का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। वहीं ओडिशा में 18 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट जारी है। जाजपुर के दशरथपुर में कानी नदी पर निर्माणाधीन पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गया।
उधर हिमाचल प्रदेश में मानसून से जुड़ी घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। 30 जून से 15 अगस्त के बीच बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में 183 लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार शाम तक राज्य में 103 सड़कें बंद थीं।
यानी यूपी से लेकर हिमाचल और ओडिशा तक मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—जलभराव, बाढ़ और बंद रास्तों के बीच लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।







