इंदौर में चाइनीज़ माँझा अब सिर्फ़ ख़तरा नहीं, खुली चुनौती बन चुका है!
आज जूनी इंदौर ब्रिज पर एक और मासूम ज़िंदगी इसकी चपेट में आ गई। दूध व्यवसायी प्रेम भंडारी, जो रोज़ की तरह मेहनत की रोटी कमाने निकले थे, अचानक क़ातिल माँझे की गिरफ्त में आ गए।
बाइक सवार प्रेम भंडारी के गले और चेहरे पर माँझे ने ऐसा वार किया कि आठ टाँके लगाने पड़े। खून से सना चेहरा, सड़क पर तड़पता इंसान और ऊपर से प्रशासन की चुप्पी! ये कोई पहली घटना नहीं है। ये तीसरी घटना है! फिर भी सवाल वही कब जागेंगे ज़िम्मेदार?
प्रतिबंध के दावे, कार्रवाई की फाइलें और ज़मीनी हक़ीक़त तीनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है। चाइनीज़ माँझा खुलेआम बिक रहा है, उड़ रहा है और इंसानों की गर्दनें काट रहा है, लेकिन कार्रवाई? सिर्फ़ बयानबाज़ी! क्या इंदौर में जान की क़ीमत इतनी सस्ती हो गई है? क्या हर बार किसी की गर्दन कटे, किसी की आँख जाए तभी प्रशासन हरकत में आएगा?
ये हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है।
अगर अब भी सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली ख़बर किसी और की ज़िंदगी निगल सकती है और तब सवाल सिर्फ़ यही होगा: “क्या तब भी हम यूँ ही चुप रहेंगे?”







