भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि 20 से 25 साल तक बच्चों को शिक्षित करने के बाद उनसे दोबारा परीक्षा देने की अपेक्षा करना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
अनुभवी शिक्षकों ने फैसले को बताया अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण
प्रदर्शन में शामिल शिक्षिका शीबा खान ने सरकार के इस निर्णय को पूरी तरह अव्यवहारिक करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी 25–26 साल के अनुभवी अधिकारी से दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? उनका कहना है कि इस आदेश से हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है और यह फैसला तानाशाही जैसा प्रतीत होता है।
वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी और उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया था। अब नए नियमों को पुराने शिक्षकों पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से उन शिक्षकों की चिंता जताई जिनकी सेवानिवृत्ति में केवल कुछ ही साल शेष हैं, और कहा कि यह फैसला उनके भविष्य को अनिश्चित बना रहा है।







