मध्य प्रदेश के फार्मा सेक्टर पर वैश्विक तनाव की मार
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के राज्यों तक साफ दिखाई देने लगा है। मध्य प्रदेश का फार्मा सेक्टर इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रदेश की करीब 100 फार्मा कंपनियों का लगभग 1000 करोड़ रुपए का निर्यात अटक गया है। हर महीने 20,000 से ज्यादा दवाइयों के कंटेनर 190 देशों में भेजे जाते हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने इस पूरी सप्लाई चेन को झटका दिया है। उद्योग जगत का मानना है कि भले ही युद्धविराम हो गया हो, लेकिन स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में 6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक का समय लग सकता है।
महंगी लॉजिस्टिक्स, कमजोर अर्थव्यवस्था और बढ़ती चुनौतियां
इस संकट का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ा है जहां मध्य प्रदेश की दवाइयों की सप्लाई होती है। ये ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर देश हैं, जहां भुगतान की स्थिति खराब हो गई है और डॉलर की कमी के कारण एक्सपोर्टर्स को समय पर पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इसके साथ ही इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी ने उद्योगपतियों की लागत बढ़ा दी है—जो पहले 24 हजार रुपए था, वह अब बढ़कर करीब 1 लाख रुपए तक पहुंच गया है। दूसरी ओर, ‘ब्लैंक सेलिंग’ जैसी समस्या ने लॉजिस्टिक्स को और मुश्किल बना दिया है, जहां जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियां कई रूट्स पर सेवाएं रद्द कर रही हैं। ऐसे में फार्मा इंडस्ट्री के सामने लागत, सप्लाई और पेमेंट—तीनों स्तर पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।







