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नीट पेपर लीक का काला कारोबार, गरीबी-अमीरी देखकर तय होती थी कीमत, ब्लैंक चेक लेकर बेचते थे सवाल, रिजल्ट आते ही परिजन मुकरने लगे

नीट पेपर लीक मामले में CBI जांच ने शिक्षा माफिया का चौंकाने वाला खेल उजागर किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह छात्रों के परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर 5 लाख से 50 लाख रुपए तक में पेपर बेचता था। अमीर परिवारों से मोटी रकम वसूली जाती थी, जबकि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों से कम रकम लेकर सौदा तय किया जाता था।

CBI के मुताबिक, पूरी रकम पहले नहीं ली जाती थी। आरोपी सिर्फ टोकन मनी लेते थे और बाकी पैसों की गारंटी के लिए परिजनों से ब्लैंक चेक और छात्रों के जरूरी डॉक्यूमेंट जमा कराते थे। गिरोह दावा करता था कि जो ‘क्वेश्चन बैंक’ दिया जा रहा है वही असली पेपर है। डील यह थी कि आंसर-की आने के बाद सवाल मैच होने पर बाकी रकम चुकानी होगी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड महाराष्ट्र का एक कोचिंग डायरेक्टर था, जो अवैध कमाई से 8 एकड़ जमीन पर स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा था।

हालांकि परीक्षा के बाद मामला पलट गया। कई परिजनों ने पैसे देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि फिजिक्स के कुछ सवाल असली पेपर से मेल नहीं खा रहे थे। कुछ परिवारों ने आधी रकम दी, जबकि बाकी पैसे रिजल्ट आने के बाद देने की बात कही।

CBI अब इस पूरे रैकेट के आर्थिक नेटवर्क, कोचिंग कनेक्शन और शामिल एजेंटों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

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