हेवानियत की इंतहा: 13 साल के मासूम का गला घोंटा, चेहरा कुचला… और लाश पर बीमार दादी को सुला दिया, इंदौर कांप उठा! सवाल ये नहीं कि हत्या कैसे हुई, सवाल ये है कि ऐसे दरिंदे हमारे बीच कैसे सांस ले रहे हैं?
ये कोई फिल्मी सीन नहीं है, ये इंदौर की वो खौफनाक सच्चाई है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। 13 साल का एक मासूम जो आठवीं में पढ़ता था, सपने देखता था उसे पहले नॉयलॉन की रस्सी से बेरहमी से गला घोंटा गया, फिर चेहरे पर ईंट से हमला कर उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया। और दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। हत्या छिपाने के लिए बच्चे की लाश पलंग पेटी में ठूंसी गई… और उसी पलंग पर एक बीमार दादी को सुला दिया गया। सोचिए कितनी ठंडी, कितनी शातिर मानसिकता होगी ये!
वारदात बच्चे के घर से महज 30 मीटर दूर, एक छह मंजिला बिल्डिंग की छत पर की गई। यानी कातिल बिल्कुल पास था इतना पास कि भरोसे के घेरे में। शुक्रवार शाम 7.30 बजे बच्चा लापता हुआ, रात भर परिवार भटकता रहा, थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। सीसीटीवी में बच्चा एक बिल्डिंग में जाता दिखा। तलाश हुई, तो छत पर खून से सना जैकेट मिला जैसे मौत खुद सुराग छोड़कर गई हो।
और सुनिए इस साजिश की बेशर्मी पुलिस जब बच्चे को ढूंढ रही थी, आरोपी रेहान (21) उन्हीं के साथ घूम रहा था! हाव-भाव से शक हुआ, पूछताछ हुई, घर की तलाशी ली गई, तब जाकर कबूलनामा टूटा शव पलंग पेटी में है। रेहान के साथ उसका दोस्त रिजवान भी था, जो फिलहाल फरार है। हत्या की वजह अब तक सामने नहीं आई है लेकिन क्या वजह किसी मासूम की जान से बड़ी हो सकती है?
रात 9.30 बजे एक महिला ने बचाओ-बचाओ की चीख सुनी थी। पुलिस ने चेक किया, कुछ नहीं मिला। सुबह छत पर खून के धब्बे मिले तीन-चार जगह, जैसे किसी ने सबूत मिटाने की नाकाम कोशिश की हो। फ्लैट में दो-तीन लोग रहते हैं, एक बुजुर्ग महिला भी। सवाल उठता है क्या किसी ने देखा और चुप रहा? क्या किसी ने सुना और नजर फेर ली?
ये सिर्फ एक हत्या नहीं है। ये हमारे सिस्टम, हमारी चुप्पी और हमारी सुरक्षा पर करारा तमाचा है। आरोपी के बड़े भाई का पहले से हत्या के केस में जेल में होनाये भी इत्तेफाक है या चेतावनी, जिसे नजरअंदाज किया गया?
आज गुस्सा जायज़ है। आज सवाल तीखे होने चाहिए। क्योंकि जब 13 साल का बच्चा अपने ही मोहल्ले में सुरक्षित नहीं, तो फिर सुरक्षित कौन है?







