मकर संक्रांति… खुशियों, पतंगों और उल्लास का पर्व।
लेकिन सवाल ये है क्या जश्न मनाने के नाम पर किसी की जान लेना जायज़ है?
इंदौर में फिर वही पुराना, शर्मनाक और खतरनाक खेल!
चाइनीज मांझा—जो पतंग नहीं उड़ाता, सीधे इंसानों की गर्दन उड़ाता है।
हर साल चेतावनी, हर साल हादसे… और फिर भी कुछ गैरजिम्मेदार लोग अपनी अक्ल घर छोड़कर छतों पर चढ़ जाते हैं। क्या त्योहार का मतलब सड़क पर चल रहे मासूमों की जान जोखिम में डालना है? क्या एक पतंग की खुशी किसी की जिंदगी से बड़ी हो गई है?
इंदौर पुलिस साफ शब्दों में कह चुकी है, यह शौक नहीं, सीधा अपराध है। लगातार कार्रवाई हो रही है और आगे भी होगी।
लेकिन अफसोस… कुछ लोग तब भी नहीं सुधरते। इसीलिए पुलिस सिर्फ डंडा नहीं चला रही, बल्कि जनता को बार-बार आगाह भी कर रही है—
🔴 दोपहिया वाहन पर छोटे बच्चों को आगे बैठाना बंद करें ये लापरवाही नहीं, बेवकूफी है।
🔴 वाहन की रफ्तार कम रखें,मांझा सेकंड नहीं देखता।
🔴 गले को मफलर, रुमाल या गर्म कपड़े से ढकें क्योंकि एक चूक आख़िरी हो सकती है।
🔴 हेलमेट पहनना विकल्प नहीं, ज़रूरत है।
🔴 पतंग उड़ानी है तो बिजली के तारों से दूर रहें, ऊँचाई वाले असुरक्षित स्थानों से नहीं।
🔴 बच्चों पर खास नजर रखें क्योंकि गलती उनकी नहीं, आपकी होगी।
और सुन लीजिए साफ-साफ
चाइनीज मांझा इस्तेमाल करना स्टाइल नहीं, सीधी हैवानियत है।
अगर आपने आज भी इसे अपनाया, तो समझ लीजिए आप त्योहार नहीं, दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।**
अब फैसला आपका है
पतंग उड़ानी है या कानून तोड़ना?
जश्न मनाना है या किसी की जिंदगी बर्बाद करना?
👉 आओ जिम्मेदारी निभाएं।
👉 खतरनाक मांझे को पूरी तरह नकारें।
👉 क्योंकि त्योहार खुशी के लिए होते हैं, खून के लिए नहीं।







