केरल के सबरीमाला मंदिर से कथित तौर पर चोरी हुए 4.5 किलो सोने का मामला अब सिर्फ द्वारपालकों की मूर्तियों तक सीमित नहीं रहा। SIT जांच में मिले नए सबूतों ने इस पूरे कांड को एक बड़े संगठित अपराध की ओर मोड़ दिया है। केरल पुलिस का दावा है कि चोरी में मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के साथ-साथ रसूखदार राजनीतिक चेहरों की भूमिका की भी जांच हो रही है, जबकि इंटरनेशनल मूर्ति तस्करी रैकेट और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क की कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं।
जांच के घेरे में वे अधिकारी भी आ गए हैं, जिनकी निगरानी में यह गड़बड़ी सामने आई। 12 दिसंबर को स्पेशल कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और CPI(M) नेता ए. पद्मकुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 17 दिसंबर को मंदिर बोर्ड से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी श्रीकुमार की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया। SIT के मुताबिक, मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों से सोने की परतें योजनाबद्ध तरीके से हटाकर बाहर भेजी गईं।
पुलिस ने एक NRI आरोपी को भी गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में तमिलनाडु के डिंडीगुल निवासी डी. मणि और केरल के उन्नीकृष्णन पोट्टी को इस चोरी का मास्टरमाइंड बताया। वहीं, केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि LDF सरकार के कार्यकाल में मंदिर की चार पंचलोहा मूर्तियों को बाहर निकालकर इंटरनेशनल क्रिमिनल नेटवर्क को बेचा गया।
अब तक इस मामले में पद्मकुमार सहित 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन चार्जशीट अभी दाखिल नहीं की गई है। जांच एजेंसियों की नजर केरल और तमिलनाडु के दो बड़े गोल्ड कारोबारियों पर भी टिकी है। सबरीमाला सोना कांड अब आस्था, प्रशासन और अपराध के खतरनाक गठजोड़ की कहानी बनता जा रहा है।







