भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति के मामले ने अब न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में इस तरह की स्थिति बेहद दुखद और चिंताजनक है। इस घटना से न केवल शहर, बल्कि देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रभावित हुई है।
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। न्यायालय ने शासन की गंभीरता को परखते हुए निर्देश दिए कि इस मामले में मुख्य सचिव स्वयं कोर्ट के समक्ष शासन का पक्ष रखें। उन्हें अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है।
अदालत ने मीडिया रिपोर्ट्स का भी उल्लेख करते हुए चिंता जताई कि शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी की आपूर्ति की खबरें सामने आ रही हैं। कोर्ट ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी और भयावह परिणाम हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और शासन की जवाबदेही पर टिकी हैं।







