घरेलू गैस पर डाका! होटलों की रसोई में पक रही थी जनता की हक की रोटी
जिले में आम लोगों को घरेलू गैस सिलिंडर के लिए जूझना पड़ रहा है, लेकिन दूसरी तरफ कुछ होटल और भोजनालय संचालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए घरेलू गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे थे। आखिरकार खाद्य आपूर्ति विभाग और कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इनकी चालाकी पकड़ी गई और कई प्रतिष्ठानों की पोल खुल गई।
शनिवार को जिला मुख्यालय में चलाए गए जांच अभियान के दौरान तीन होटलों से कुल 10 घरेलू एलपीजी सिलिंडर बरामद किए गए। यह वही सिलिंडर हैं जिनके लिए आम उपभोक्ता कई-कई दिन इंतजार करते हैं, लेकिन कुछ कारोबारियों की रसोई में ये धड़ल्ले से जल रहे थे।
कार्रवाई के दौरान पुरानी डिंडौरी तिराहा स्थित माँ रेवा होटल से पांच घरेलू गैस सिलिंडर जब्त किए गए। यहीं स्थित नकुल होटल से तीन सिलिंडर बरामद हुए, जबकि राज्य परिवहन बस स्टैंड के पास स्थित मोले भोजनालय से दो घरेलू गैस सिलिंडर जब्त किए गए। इन सिलिंडरों का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा था, जो साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
जांच टीम ने मौके पर ही सभी सिलिंडरों को जब्त कर इंडेन गैस एजेंसी डिंडौरी के सुपुर्द कर दिया और द्रविकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय एवं वितरण विनिमय आदेश 2000 के तहत प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस कार्रवाई में सहायक आपूर्ति अधिकारी शमीम खान, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी आकाश तुरकर, कोतवाली एसआई बीएल बरकडे सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
कार्रवाई की खबर जैसे ही बाजार में फैली, होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और चाय-नाश्ते की दुकानों के संचालकों में हड़कंप मच गया। कई जगहों पर अचानक रसोई की आग धीमी पड़ती नजर आई, तो कहीं सिलिंडर गायब करने की जल्दबाजी दिखी।
जनता लाइन में, और कारोबारियों की रसोई में जल रही घरेलू गैस!
दरअसल जिले में घरेलू गैस की कमी को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क है। कलेक्टर अंजू भदौरिया के निर्देश पर जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, ताकि घरेलू एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर नजर रखी जा सके और आम उपभोक्ताओं को समय पर राहत मिल सके।
कंट्रोल रूम के माध्यम से अधिकारी गैस एजेंसियों, ऑयल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों से समन्वय बनाकर रोजाना उपलब्ध स्टॉक की जानकारी जुटाएंगे। साथ ही उपभोक्ताओं से आने वाली शिकायतों का तुरंत समाधान करने और उसका रिकॉर्ड रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन सवाल अब भी वही है जब प्रशासन आम लोगों को गैस उपलब्ध कराने के लिए कंट्रोल रूम बना रहा है, तो कुछ कारोबारी आखिर किस हक से जनता के हिस्से की गैस अपनी कमाई की भट्टी में झोंक रहे थे? कार्रवाई तो हुई है, मगर यह भी देखना होगा कि क्या यह सख्ती आगे भी जारी रहती है या फिर कुछ दिनों बाद वही पुराना खेल दोबारा शुरू हो जाएगा।







