उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा और हिंदू जागरण मंच ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार से अपील की है कि मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
उनका कहना है कि यह नियम सिर्फ महाकाल तक सीमित न रहे, बल्कि उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों और देशभर के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में एक समान रूप से लागू हो।
पुजारी महेश शर्मा ने साफ किया कि मुद्दा किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि आस्था की शुद्धता से जुड़ा है। जो गैर-हिंदू सनातन धर्म में सच्ची श्रद्धा रखते हैं, उनके लिए मंदिर के द्वार खुले रहने चाहिए। लेकिन जो लोग केवल पर्यटन, मनोरंजन या गलत इरादों से मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं, उनसे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और यही सबसे बड़ी चिंता है।
हिंदू जागरण मंच ने दावा किया है कि वर्ष 2025 में ही महाकाल मंदिर परिसर से 12 से अधिक युवक पकड़े गए, जो लड़कियों के साथ संदिग्ध परिस्थितियों में मंदिर क्षेत्र में घूमते पाए गए। संगठन का कहना है कि महाकाल क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील रहा है और ऐसी घटनाएं अनुशासन व सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं।
मंच के रितेश माहेश्वरी ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने घर वापसी कर ली है, उन्हें इस नियम से अलग रखा जाए, लेकिन बाकी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक जरूरी है।
संगठन ने मांग को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि महाकाल के साथ-साथ काल भैरव, मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम जैसे उज्जैन के अन्य धार्मिक स्थलों में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा से जुड़े मंदिरों में इस तरह के प्रतिबंध की खबरों के बाद अब यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।
अब सवाल यही है, क्या सरकारें आस्था की इस मांग को कानून का रूप देंगी, या फिर यह बहस यूं ही धार्मिक और सामाजिक विमर्श में उलझी रहेगी? महाकाल की नगरी से उठी यह आवाज़ आने वाले दिनों में बड़ा फैसला मांग रही है।







