इंदौर… स्मार्ट सिटी के दावों के बीच आज हकीकत गटर में गिरती नजर आई। शहर के सबसे व्यस्त बड़े सराफा बाजार में, खुले चैंबर ने एक बार फिर नगर निगम की लापरवाही को नंगा कर दिया। चलती सड़क पर चैंबर का ढक्कन खोलकर सफाई और बिना किसी चेतावनी, बिना बैरिकेडिंग क्या यही है सुरक्षा का मापदंड?
एक युवती, जो सड़क किनारे से गुजर रही थी, अचानक गंदे पानी से भरे चैंबर में जा गिरी। पल भर में चीखें गूंजीं, अफरा-तफरी मच गई। युवती के पैर में चोट आई, और सवाल यह उठा अगर आज मदद न मिलती, तो जिम्मेदार कौन होता?
नगर निगम के कर्मचारी मौके पर थे, वाहन सड़क पर खड़ा था, चैंबर खुला छोड़ा गया था। क्या किसी ने सोचा कि इसी रास्ते से लोग चलेंगे? क्या किसी ने चेतावनी देना जरूरी समझा? जवाब नहीं। क्योंकि लापरवाही यहां आदत बन चुकी है।
स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाई, युवती को बाहर निकाला, लेकिन सवाल अब भी सड़क पर पड़ा है क्या किसी की जान जाने के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे?
इंदौर में आज फिर साबित हो गया यह सिर्फ एक हादसा नहीं, यह सिस्टम की असफलता है। और जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक हर खुला चैंबर… अगला खतरा बना रहेगा।







