भारत की लाखों रसोइयों में इस्तेमाल होने वाला मशहूर ब्रांड एवरेस्ट अब गंभीर सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एवरेस्ट के कई मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए हैं। जिन प्रोडक्ट्स में गड़बड़ी सामने आई है, उनमें एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट चिकन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरी लाल मिर्च और एवरेस्ट मीट मसाला शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच में इन मसालों में एंटेरो बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है, जो साफ-सफाई और प्रोसेसिंग पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यही नहीं, कई तरह के खतरनाक पेस्टिसाइड्स भी पाए गए हैं, जो लंबे समय तक शरीर में जाने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
सोचिए… जिस मसाले को लोग स्वाद बढ़ाने के लिए अपने खाने में डालते हैं, वही अगर बैक्टीरिया और जहरीले केमिकल्स से भरा हो, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सीधे-सीधे लोगों की सेहत से खिलवाड़ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट्स अगर इस तरह की जांच में फेल हो रहे हैं, तो फिर आम उपभोक्ता आखिर भरोसा किस पर करे? क्या ब्रांड के नाम पर सिर्फ पैकेजिंग बेची जा रही है और अंदर क्वालिटी भगवान भरोसे छोड़ दी गई है?
अब जिम्मेदारी सिर्फ कंपनी की नहीं, बल्कि फूड सेफ्टी एजेंसियों की भी है। अगर जांच में इतनी खामियां सामने आई हैं, तो सख्त कार्रवाई कब होगी? क्या इन प्रोडक्ट्स को बाजार से हटाया जाएगा या फिर सब कुछ पहले की तरह चलता रहेगा? क्योंकि सवाल सिर्फ मसाले का नहीं है… सवाल है हर उस थाली का, जो रोज लाखों घरों में परोसी जाती है।







