गुना जिले के बमोरी थाना क्षेत्र से इंसाफ की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। ग्राम रामपुर की रहने वाली एक वृद्ध मां अपने घायल और लहूलुहान बेटे को लेकर तपती सड़क पर नंगे पैर दंडवत प्रणाम करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। चिलचिलाती धूप और झुलसा देने वाली गर्मी भी इस परिवार के हौसले को नहीं तोड़ सकी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि शायद अब उनकी आवाज सुनी जाएगी।
जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित जितेंद्र रजक और उनकी मां रतनबाई ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोग लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि दबंगों की नजर उनके पुश्तैनी मकान पर है और वे उसे जबरन औने-पौने दामों में खरीदना चाहते हैं। घर बेचने से इनकार करने पर लगातार धमकियां दी जा रही हैं, मारपीट की जा रही है और गांव छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।
जब मां-बेटे की यह दर्दनाक दंडवत यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंची तो वहां मौजूद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। तहसीलदार तत्काल मौके पर पहुंचे और दोनों को सहारा देकर अंदर ले गए। इसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को एसपी कार्यालय भेजा गया, जहां उनकी शिकायत पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक बेबस मां को न्याय पाने के लिए सड़क पर दंडवत क्यों करना पड़ा? क्या स्थानीय स्तर पर उसकी शिकायतें अनसुनी की गईं? फिलहाल पूरा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।







