आज संसद मार्च के दौरान हुई कथित बर्बरता और हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई होने जा रही है। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि अदालत अब उन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेगी जिन पर अब तक सियासी और सामाजिक बहस जारी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित अत्याचारों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस सुनवाई में सबसे बड़ा मुद्दा यह होगा कि क्या पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया जाए।
इस मामले की पृष्ठभूमि भी काफी अहम है। परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला था। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस आंदोलन को समाप्त कर दिया गया था। लेकिन संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद अभी भी थमा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर पुलिसकर्मियों पर हमला किसने किया? क्या यह हमला प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने किया था, या फिर भीड़ में घुस आए कुछ असामाजिक और शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ा? अदालत इसी पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर सकती है।
यदि अदालत SIT गठन को मंजूरी देती है, तो पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का रास्ता खुल सकता है। ऐसे में आज की सुनवाई न केवल इस मामले के भविष्य, बल्कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जवाबदेही तय करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।







