ईरान में जारी युद्ध के बीच वहां रह रहे भारतीयों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले बिलाल अहमद भट्ट के लिए 9 मार्च की रात किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। रात करीब 3 बजे उनकी बेटी का फोन आया, जो ईरान की राजधानी तेहरान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
फोन उठाते ही बिलाल ने बेटी की घबराई हुई आवाज सुनी। वह रोते हुए कह रही थी कि उसके हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरने और बमबारी की तेज आवाजें आ रही हैं। डर के मारे वह लगातार रो रही थी और अपने पिता से कह रही थी कि उसे वहां से बचा लिया जाए।
बिलाल अहमद भट्ट बताते हैं कि अब ऐसे फोन कॉल वहां रह रहे भारतीयों की नियति बन गए हैं। हर रात डर के साये में गुजरती है और हर सुबह सिर्फ इस राहत के साथ शुरू होती है कि एक और रात किसी तरह कट गई। लेकिन अगली रात क्या होगा, इस चिंता से कोई भी मुक्त नहीं हो पा रहा। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष का आज 12वां दिन है। लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस युद्ध में अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है और हिंसा रुकने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की बात कही है। दूसरी तरफ ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और मिडिल ईस्ट के कई इलाकों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों में भी डर का माहौल है। अब तक करीब 12 हजार भारतीयों ने भारत लौटने के लिए आवेदन किया है।
भारत ने इस संघर्ष में आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, लेकिन उसके दो बड़े हित दांव पर लगे हैं। पहला, मिडिल ईस्ट के देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित निकालना। दूसरा, खाड़ी देशों से आने वाली तेल और गैस की सप्लाई, जिस पर भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक निर्भर करती हैं।







