देशभर की सरकारी कार्यशैली में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अहम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, तेज और परिणाम आधारित बनाया जाए। सरकार का मानना है कि यदि अधिकारी अपनी रोजमर्रा की कार्यशैली में छोटे-छोटे सुधार करें, तो प्रशासनिक गुणवत्ता बढ़ेगी, तनाव कम होगा और जनता को सरकारी सेवाएं पहले से कहीं अधिक तेजी से मिल सकेंगी।
केंद्र सरकार ने विशेष रूप से सरकारी बैठकों को लेकर चिंता जताई है। निर्देशों में कहा गया है कि अक्सर बैठकें तय समय से देर से शुरू होती हैं, जरूरत से ज्यादा लंबी चलती हैं और कई बार घंटों चर्चा के बावजूद कोई स्पष्ट निर्णय नहीं निकलता। ऐसी कार्यप्रणाली से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि फाइलों के निपटारे में भी देरी होती है। इसलिए अधिकारियों को समयबद्ध बैठकें करने, स्पष्ट एजेंडा तय करने और तय समय में निर्णय लेने की आदत विकसित करने की सलाह दी गई है।
भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने मुख्य सचिवों और राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के महानिदेशकों को भेजे पत्र में कहा है कि अधिकारियों से बातचीत के दौरान यह महसूस किया गया कि केवल विषय आधारित प्रशिक्षण ही पर्याप्त नहीं है। सरकारी कामकाज की व्यावहारिक प्रक्रिया, समय प्रबंधन, निर्णय क्षमता और प्रभावी प्रशासनिक व्यवहार पर भी नियमित मार्गदर्शन जरूरी है, ताकि अधिकारी बेहतर प्रशासक और कुशल प्रबंधक बन सकें।
अगर इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो सरकारी फाइलों की गति तेज होगी, निर्णय लेने में होने वाली देरी कम होगी और आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएं मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।







