देशभर में आस्था, भक्ति और उत्साह का सबसे बड़ा पर्व जगन्नाथ रथयात्रा पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। गुजरात के अहमदाबाद से लेकर ओडिशा के पुरी तक भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं।
सबसे पहले बात अहमदाबाद की, जहां विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा सुबह विधि-विधान के साथ शुरू हुई। जामालपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में तड़के मंगला आरती का आयोजन हुआ, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। इसके बाद सुबह सात बजे भगवान का रथ श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच रवाना हुआ।
यात्रा के दौरान इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत रखा गया। पिछले वर्ष तीन हाथियों के बेकाबू होने की घटना को देखते हुए इस बार हाथियों को नियंत्रित रखने के लिए उनके पैरों में सुरक्षा जंजीरें लगाई गईं। वहीं खड़िया पोल क्षेत्र में हाथियों के पहुंचते ही एहतियात के तौर पर लोगों को सड़क से हटा दिया गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो सके।
रथयात्रा को रवाना करने से पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने परंपरा निभाते हुए सोने की झाड़ू से रथ के आगे मार्ग की सफाई की। इस धार्मिक परंपरा को विनम्र सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
अब रुख करते हैं भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी का, जहां भव्य रथयात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पहंडी रस्म के तहत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके विशाल रथों पर विराजमान कराया जा रहा है। इसके बाद गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव पारंपरिक ‘छेरा पहंरा’ रस्म निभाते हुए सोने की झाड़ू से रथों के आगे मार्ग की सफाई करेंगे। यह परंपरा इस संदेश का प्रतीक है कि भगवान के सामने सभी समान हैं।
शाम को लाखों श्रद्धालु लगभग तीन किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान भगवान के रथों को खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक लेकर जाएंगे। देश और दुनिया की निगाहें इस दिव्य और ऐतिहासिक रथयात्रा पर टिकी हुई हैं, जहां आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।







