मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मजदूरी भुगतान में हो रही देरी को लेकर शुक्रवार को जिला मुख्यालय में अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में निकाली गई आक्रोश रैली में विधायक, पूर्व विधायक और बड़ी संख्या में मजदूरों ने कटोरा लेकर सड़कों पर भीख मांगी और सरकार पर मजदूरों के हक मारने का आरोप लगाया।
जिले में पिछले तीन महीनों से मनरेगा के तहत 44 करोड़ रुपए से अधिक की मजदूरी लंबित बताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर कॉलेज तिराहा से रैली की शुरुआत हुई, जो सुबखार, अवंती चौक बस स्टैंड, भारत माता चौक, एसबीआई तिराहा, कलेक्ट्रेट तिराहा होते हुए पुरानी डिंडौरी तिराहा तक पहुंची और फिर वापस कलेक्ट्रेट में समाप्त हुई।
रैली में डिंडौरी विधायक ओमकार मरकाम और पूर्व विधायक भूपेंद्र मरावी भी शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान विधायक और अन्य कांग्रेस पदाधिकारियों ने दुकानदारों व राहगीरों से भीख मांगी। इस दौरान कुल 5390 रुपए नकद राशि के साथ दाल, सब्जी और तेल भी एकत्रित किया गया। विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार का खजाना खाली है, इसलिए मजदूरों का भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि भीख में जुटाई गई राशि और सामग्री प्रतीकात्मक रूप से केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
गौरतलब है कि 9 फरवरी को विधायक द्वारा ज्ञापन सौंपकर 12 फरवरी तक भुगतान करने की मांग की गई थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि भुगतान न होने पर 13 फरवरी को प्रदर्शन और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। हालांकि प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने पर पुतला दहन कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया और भीख मांगकर विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन अपर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत कोतवाली, समनापुर, शाहपुर, करंजिया और बजाग थानों से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
मनरेगा भुगतान को लेकर जिले में बढ़ता असंतोष अब राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। मजदूरों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है, वहीं कांग्रेस ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है।







