देपालपुर (मध्य प्रदेश) के राजेंद्र चौधरी की जिंदगी एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई, जहां सपने और सच्चाई के बीच 16 साल लंबा संघर्ष खड़ा हो गया। अधिकारी बनने का सपना देखने वाले राजेंद्र ने पहले ही प्रयास में PSC प्री परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उनका जीवन अचानक उस समय बदल गया जब वे नागदा के पास पिरलई गांव में रामायण पाठ कर रहे थे। तभी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
राजेंद्र चौधरी पर 2012 में गिरफ्तारी के बाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और मालेगांव ब्लास्ट जैसे गंभीर मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों ने उनकी पूरी जिंदगी को उलझा दिया और वर्षों तक वे जेल और कानूनी लड़ाई में फंसे रहे।
हाल ही में कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। बरी होने के बाद राजेंद्र ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि हिरासत के दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि उन पर झूठी गवाही देने का दबाव भी बनाया गया।
इंदौर से करीब 42 किलोमीटर दूर देपालपुर के धाकड़ सेरी गांव में रहने वाले राजेंद्र आज भी उन 16 वर्षों की यादों के बोझ से जूझ रहे हैं। एक तरफ न्याय मिलने की राहत है, तो दूसरी तरफ खोए हुए सालों और टूटे सपनों का दर्द भी उनके साथ है।







