लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक ऐसी कोचिंग बिल्डिंग, जिसे वर्षों पहले अवैध घोषित कर गिराने का आदेश दिया गया था, वही इमारत अब 15 मासूम जिंदगियों की कब्र बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 5 महिलाएं और 10 पुरुषों की मौत हुई है, जिनमें अधिकांश युवा छात्र थे, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए वहां पढ़ाई कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे एसी ब्लास्ट के बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग धुएं और लपटों से भर गई। कई छात्र जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, लेकिन कुछ को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। फायर ब्रिगेड की 19 गाड़ियों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने करीब 7 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। दीवारें तोड़कर एक-एक शव बाहर निकाला गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बिल्डिंग को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, वह आज तक कैसे खड़ी रही? आखिर किसकी मेहरबानी से यह अवैध निर्माण वर्षों तक चलता रहा? हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया है। बिल्डिंग मालिक समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
घटना स्थल और अस्पताल पहुंचे नेताओं और अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। लेकिन अब सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, जवाबदेही का है। क्या 15 मौतों के बाद व्यवस्था जागी है, या फिर यह भी कुछ दिनों बाद फाइलों में दब जाएगा? पूरा देश इस सवाल का जवाब चाहता है।







