रीवा की बेटी गोल्डी साकेत की कहानी सिर्फ एक मौत की खबर नहीं, बल्कि उन दर्दनाक चीखों की कहानी है जो शायद समय रहते सुनी जातीं तो आज एक बेटी जिंदा होती। 35 दिन बाद कब्र से निकाली गई गोल्डी की लाश ने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही गोल्डी लगातार प्रताड़ना झेल रही थी। उसकी मां बेबी साकेत बताती हैं कि बेटी अक्सर छिपकर फोन करती थी। फोन पर वह रोते हुए कहती थी कि उसका पति साहिल उसे बेरहमी से मारता है। मां के मुताबिक, गोल्डी ने कई बार बताया था कि उसे कपड़े उतरवाकर पीटा जाता था और उसकी चीखों में ही प्रताड़ित करने वाले को सुकून मिलता था।
परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात नहीं बदले। फिर अचानक एक दिन गोल्डी का फोन आना बंद हो गया। कुछ समय बाद परिवार को उसकी मौत की खबर मिली। बेटी की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया, लेकिन उनके मन में यह सवाल लगातार बना रहा कि आखिर गोल्डी की मौत कैसे हुई।
अब 35 दिन बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत गोल्डी का शव कब्र से बाहर निकाला गया है ताकि मौत के कारणों की दोबारा जांच की जा सके। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है। परिवार का आरोप है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध का मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गोल्डी के माता-पिता आज भी इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनकी मांग है कि बेटी के साथ हुई हर प्रताड़ना की परत खोली जाए और यदि किसी ने उसे मौत के मुंह तक पहुंचाया है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। लेकिन एक सवाल आज भी गूंज रहा है क्या गोल्डी की चीखें समय रहते सुनी जातीं, तो क्या आज उसकी जिंदगी बच सकती थी? यही सवाल अब न्याय की सबसे बड़ी पुकार बन चुका है।







