दुनिया एक बार फिर मौसम के बड़े खतरे की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 29 साल बाद फिर से “गॉडजिला अल नीनो” जैसी परिस्थितियां बन रही हैं। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी यानी JPL द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों में समुद्र के भीतर तेजी से बढ़ती गर्मी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में जमा हो रही यह अतिरिक्त ऊष्मा वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित कर सकती है। इसका सीधा असर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ने की आशंका है। जहां एक तरफ कई इलाकों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 1997 में बना सुपर अल नीनो आधुनिक इतिहास के सबसे शक्तिशाली मौसमीय घटनाक्रमों में से एक था। अब जून 2026 में बन रही परिस्थितियां उसी की याद दिला रही हैं। अगर समुद्र का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खेती, जल संसाधन और करोड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें प्रशांत महासागर पर टिकी हैं। आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि यह अल नीनो सामान्य रहेगा या फिर “गॉडजिला अल नीनो” बनकर मौसम का नया संकट खड़ा करेगा।
कैमरे के पीछे से लेकर खेतों तक, हर किसी की चिंता अब एक ही है क्या इस बार मौसम का मिजाज फिर इतिहास दोहराएगा?







