महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना के भीतर शुरू हुआ सियासी संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। उद्धव ठाकरे गुट को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उनके 9 में से 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया।
मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नंदनवन बंगले पर हुई अहम बैठक के बाद इन सांसदों ने सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने का ऐलान कर दिया। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और शिवसेना की अंदरूनी लड़ाई को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने इसे अपनी विचारधारा की जीत बताते हुए कहा कि 2022 में 40 विधायकों के साथ शुरू हुआ आंदोलन अब अगले चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि यह लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों और शिवसेना की मूल पहचान को बचाने के लिए लड़ी जा रही है। शिंदे ने कहा कि अब चौके नहीं, छक्के लग रहे हैं और पार्टी लगातार मजबूत हो रही है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के बेटे और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने पाला बदलने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ऐसे नेताओं को “बिकाऊ” बताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और सही समय पर जवाब देगी।
चार साल के भीतर शिवसेना में यह दूसरी बड़ी टूट मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और महाराष्ट्र की सियासत पर साफ दिखाई दे सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह टूट यहीं थमेगी या आने वाले दिनों में और भी बड़े राजनीतिक चेहरे अपना पाला बदल सकते हैं।







