कभी महंगाई से जूझती रसोई, कभी सिलेंडर की कीमतों से परेशान आम आदमी… और अब सरकार का नया फरमान।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि जिन घरों में PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस का कनेक्शन है, वे घरेलू LPG सिलेंडर नहीं रख सकते।
सवाल यह है कि यह फैसला सुविधा बढ़ाने के लिए है या लोगों की मुश्किलें बढ़ाने के लिए? क्योंकि देश के लाखों घरों में PNG होने के बावजूद लोग LPG सिलेंडर बैकअप के तौर पर रखते हैं। गैस प्रेशर कम हो जाए, लाइन में दिक्कत आ जाए या मेंटेनेंस का काम चल रहा हो ऐसे में सिलेंडर ही रसोई को बचाता है।
लेकिन अब लगता है कि सरकार को आम आदमी की रसोई की हकीकत से ज्यादा कागजों का गणित पसंद आ गया है। एक झटके में कह दिया गया PNG है तो LPG नहीं रख सकते। जैसे रसोई कोई प्रयोगशाला हो और लोग कोई सरकारी फाइल।
सोचिए, जिन शहरों में PNG की सप्लाई कभी भी बाधित हो जाती है, वहां लोग क्या करेंगे? क्या हर बार होटल का दरवाजा खटखटाएंगे? या फिर सरकार बताएगी कि भूखे पेट नीति समझना भी देशभक्ति का हिस्सा है?
सरकार कहेगी कि यह व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने का कदम है, लेकिन आम आदमी पूछ रहा है — व्यवस्था ठीक करने के नाम पर रसोई की आज़ादी क्यों छीनी जा रही है?
क्या यह नया सुधार है… या फिर एक और फैसला, जिसका बोझ सीधे आम लोगों की थाली पर गिरने वाला है?







