भागीरथपुरा में मातम का साया, 17 मौतों के बाद भी सिस्टम बेख़बर
भागीरथपुरा… एक ऐसा इलाक़ा जहाँ पानी जीवन नहीं, बल्कि मौत बनकर बह रहा है।
दूषित पानी ने पहले 6 महीने के मासूम अव्यान की सांसें छीन लीं, और अब उसी माँ की हालत भी गंभीर बनी हुई है। उल्टी-दस्त की चपेट में आई माँ को भागीरथपुरा स्थित आरोग्यं स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए लाया गया, लेकिन आरोप है कि वहाँ किसी भी स्वास्थ्य कर्मचारी ने समय पर ध्यान नहीं दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दूषित पानी से फैल रही बीमारी अब तक 17 लोगों की जान ले चुकी है। हर घर में डर है, हर माँ की आँखों में अपने बच्चे को खो देने का खौफ। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी मौतों के बाद भी न तो पानी की सप्लाई रोकी गई, न ही स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। मासूम अव्यान के पिता सुनील साहू का दर्द अब गुस्से में बदल चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2 लाख रुपये की सहायता राशि यह कहते हुए लौटा दी कि पैसे से मेरे बच्चे की जान वापस नहीं आएगी, हमें इंसाफ़ चाहिए, सिस्टम की जवाबदेही चाहिए। भागीरथपुरा आज सिर्फ़ एक इलाक़ा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का ज़िंदा सबूत बन चुका है।
सवाल यही है
*क्या प्रशासन अगली मौत का इंतज़ार कर रहा है?*
*और क्या दूषित पानी के इस ज़हर पर कभी लगेगी रोक?*







