मध्य प्रदेश में मानसून के फिर सक्रिय होते ही कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मऊगंज, उमरिया, डिंडौरी, पन्ना, चित्रकूट, रीवा और सतना में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कहीं नदियां उफान पर हैं, तो कहीं सड़कें और बस्तियां पानी में डूब गई हैं।
मऊगंज में अष्टभुजा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से नईगढ़ी गांव में बाढ़ का पानी घुस गया। अमृत योजना के निर्माण कार्य में लगे चार मजदूर बाढ़ के बीच फंस गए। इनमें से एक मजदूर तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। बताया जा रहा है कि उसने करीब दो घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाई।
उमरिया में भी बाढ़ का पानी आफत बन गया, जहां एक बुजुर्ग के बह जाने की खबर सामने आई है। वहीं डिंडौरी में लगातार बारिश को देखते हुए आंगनवाड़ी से लेकर कक्षा 12वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने के कारण डिंडौरी-मंडला स्टेट हाईवे पर आवागमन रोकना पड़ा है। पन्ना में भी 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है। हालात इतने बिगड़ गए कि सड़कों पर नाव चलती नजर आ रही हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को भी बंद कर दिया गया है।
रीवा में निराला नगर हॉस्टल सहित करीब नौ इलाकों में जलभराव से मुश्किलें बढ़ गई हैं। घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों का सामान खराब हो रहा है। सतना और आसपास के इलाकों में भी कई बस्तियां जलभराव की चपेट में हैं।
लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन और राहत दलों की चुनौती बढ़ गई है। फिलहाल लोगों से नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।






