जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे गंभीर सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के कथित पैलेटगन इस्तेमाल और महिलाओं से बदसलूकी के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है।
इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान इस जांच कमेटी के गठन का फैसला किया था। अब कमेटी प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की पड़ताल करेगी। खास तौर पर पैलेटगन के कथित इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी जैसे आरोप जांच के केंद्र में रहेंगे।
नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। यह आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला और 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ।
लेकिन प्रदर्शन खत्म होने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित पांच सदस्यीय कमेटी इन आरोपों की जांच करेगी।
इस फैसले के बाद सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है? क्या प्रदर्शनकारियों के आरोप सही साबित होंगे या पुलिस कार्रवाई को नियमों के अनुरूप पाया जाएगा? अब इन तमाम सवालों का जवाब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट से सामने आएगा।







