रीवा के गायत्री नगर में 19 अगस्त की बाढ़ को 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। करीब 35 घरों के 200 से ज्यादा लोग पानी के बीच जिंदगी काटने को मजबूर हैं। सवाल सीधा है—बाढ़ का पानी उतर गया या प्रशासन की संवेदनशीलता?
बच्चों का स्कूल जाना बंद है, बुजुर्ग और महिलाएं घरों में कैद हैं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ट्यूब का सहारा लेना पड़ रहा है। यानी सड़कें नहीं, अब लोग पानी के रास्ते जिंदगी बचाने निकल रहे हैं।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौके पर पहुंची टीम के सदस्य भी कई जगह कमर से ऊपर तक पानी में डूब गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद उन्हें समाधान के बजाय धमकी तक सुननी पड़ी।
अब सवाल प्रशासन से है—क्या 200 लोगों की परेशानी दिखाई नहीं दे रही? क्या बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की जिंदगी और परिवारों की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी कुछ और है?
8 दिन बीत गए… पानी नहीं निकला। अब जनता पूछ रही है—आखिर जिम्मेदारी किसकी है और कार्रवाई कब होगी?







