मध्यप्रदेश में गरीब परिवारों के लिए सस्ते राशन की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अंत्योदय परिवारों को राशन दुकानों से मिलने वाली ₹20 किलो की चीनी पिछले करीब 5 महीने से बंद है। इसका सीधा असर प्रदेश के लगभग 14 लाख अंत्योदय परिवारों पर पड़ रहा है।
दरअसल, पहले इन परिवारों को गेहूं और चावल के साथ हर महीने एक किलो चीनी भी सिर्फ ₹20 प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन अब सोसायटियों और राशन दुकानों पर चीनी की सप्लाई रोक दी गई है। नतीजा यह है कि जिन परिवारों के लिए हर एक रुपए की बचत मायने रखती है, उन्हें अब बाजार से महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है।
सबसे बड़ी चिंता बाजार की कीमतों को लेकर है। चीनी की कीमत करीब ₹70 किलो तक पहुंचने के बीच गरीब परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। यानी जिस चीनी के लिए पहले ₹20 खर्च होते थे, उसी के लिए अब कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
चीनी की सप्लाई बंद होने के पीछे केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी बंद होने की वजह बताई जा रही है। हालांकि, इस फैसले का असर सीधे उन परिवारों पर पड़ रहा है जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर काफी हद तक निर्भर हैं।
अब सवाल यह है कि जब महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है, तब गरीब परिवारों को मिलने वाली सस्ती चीनी की सुविधा आखिर कब बहाल होगी? क्या सरकार दोबारा ₹20 किलो वाली चीनी उपलब्ध कराएगी, या फिर लाखों अंत्योदय परिवारों को बाजार की महंगी चीनी पर ही निर्भर रहना पड़ेगा?
फिलहाल 14 लाख परिवारों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। गरीबों की थाली से चीनी गायब होने का यह मुद्दा अब सिर्फ राशन की सप्लाई का नहीं, बल्कि परिवारों के बढ़ते घरेलू खर्च और राहत का भी बड़ा सवाल बन गया है।







