केरल के इतिहास का एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला अध्याय है ‘मुलक्करम’ यानी ब्रेस्ट टैक्स की प्रथा। यह कर निचली जाति की महिलाओं पर लगाया जाता था, जिसमें उन्हें अपने स्तनों को ढकने के अधिकार के लिए टैक्स देना पड़ता था। सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव से उपजी यह व्यवस्था महिलाओं की गरिमा पर सीधा आघात थी। उस समय उच्च जाति के सामने निचली जाति की महिलाओं को अपने शरीर को ढकने की अनुमति नहीं थी, और यदि वे ऐसा करना चाहती थीं तो उन्हें कर चुकाना पड़ता था। यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि सामाजिक नियंत्रण का भी एक कठोर माध्यम था।
इस प्रथा का असर समाज पर गहरा था, और यह लंबे समय तक केरल के सामाजिक ढांचे में असमानता का प्रतीक बनी रही। इतिहासकारों के अनुसार, इस तरह के करों ने जाति व्यवस्था को और मजबूत किया और महिलाओं को दोहरे भेदभाव का सामना करना पड़ा एक जाति के आधार पर और दूसरा लिंग के आधार पर।
इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ सबसे बड़ा और साहसी विरोध एक महिला नंगेली ने किया। कहा जाता है कि जब कर वसूलने वाले अधिकारी उनके घर पहुंचे, तो नंगेली ने इस अन्याय के खिलाफ विद्रोह करते हुए अपने स्तन काटकर उन्हें कर के रूप में सौंप दिया। इस दर्दनाक और साहसी कदम ने पूरे समाज को झकझोर दिया।
नंगेली का यह बलिदान केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं था, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत बना। उनके इस कदम के बाद इस प्रथा को लेकर व्यापक विरोध शुरू हुआ और अंततः इस तरह के करों को समाप्त करने की दिशा में बदलाव आया। आज भी केरल की कई जगहों और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श में नंगेली की कहानी को याद किया जाता है। माना जाता है कि इस ऐतिहासिक घटना का प्रभाव आज भी राज्य की कई सीटों पर सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक सोच में देखा जा सकता है।







