इंदौर में एक मामूली सी बात पेंटहाउस की लाइट बंद करने को लेकर ऐसा भड़की कि लोगों ने इंसानियत ही भूल दी। रहवासियों ने खुद को मालिक समझते हुए पेंटहाउस की लाइट बंद कर दी, और यहीं से शुरू हुआ अहंकार, दबंगई और बदतमीज़ी का खेल।
पेंटहाउस मालिक ने जब इसका विरोध किया, तो मामला बातचीत से नहीं बल्कि हाथापाई से सुलझाने की कोशिश की गई। देखते ही देखते बहस गालियों में बदली और गालियां सीधे मारपीट में। सवाल ये है क्या अब इंदौर में कानून नहीं, भीड़ का मूड चलता है?
स्थिति तब और शर्मनाक हो गई जब एक लड़का अपने पिता को बचाने के लिए बीच में आया। लेकिन भीड़ को ना उम्र दिखी, ना रिश्ता। उसे भी घेर लिया गया, जैसे इंसाफ नहीं, सिर्फ बदला चाहिए था। मारपीट के बीच वो किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद पेंटहाउस को किराए पर देने को लेकर पहले से simmer कर रहा था। यानी ये गुस्सा आज का नहीं था, बस एक लाइट बंद होने ने उसे भड़का दिया। अब बड़ा सवाल क्या इंदौर में छोटी-छोटी बातों पर ऐसे ही सड़कों पर फैसला होगा? क्या कानून सिर्फ कागजों में रह गया है? और सबसे बड़ा तंज जो लोग खुद को सभ्य समाज का हिस्सा बताते हैं, क्या वही असल में सबसे खतरनाक भीड़ बन चुके हैं?







