26 जनवरी की सुबह… कर्तव्य पथ पर कदमताल की गूंज होगी, सलामी की चमक होगी, और उसी पल इतिहास भी बन रहा होगा। इस बार गणतंत्र दिवस की परेड सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि साहस, समर्पण और भरोसे की अनकही कहानी कहेगी। वजह हैं, भोपाल की बेटी कैप्टन हर्षिता राघव, जो भारतीय सेना के ‘साइलेंट वारियर्स’ यानी मूक योद्धाओं के अनोखे दस्ते का नेतृत्व करने जा रही हैं।
यह दस्ता पहली बार दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखाएगा। इसमें केवल वर्दीधारी जवान ही नहीं, बल्कि वे वफादार साथी भी शामिल होंगे जो बोलते नहीं, लेकिन दुर्गम सीमाओं पर देश की रक्षा में हमेशा आगे रहते हैं। बाज, घोड़े, दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट और आर्मी डॉग्स, सब एक साथ, एक ही लय में, एक ही कमान के नीचे कदमताल करते नजर आएंगे। और उस कमान को थामे होंगी कैप्टन हर्षिता।
कैप्टन हर्षिता राघव का सैन्य सफर देशभक्ति की विरासत से जुड़ा है। उनके पिता भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं, और वही अनुशासन व जज़्बा आज बेटी की वर्दी में झलकता है। रिमाउंट एंड वेटनरी कॉर्प्स में शामिल महिला अधिकारियों के शुरुआती बैच से आने वाली कैप्टन हर्षिता अब नेतृत्व की भूमिका में हैं। खास बात यह है कि इस विशेष पशु दस्ते का नेतृत्व करने वाली वह पहली महिला अधिकारी होंगी।
इस ऐतिहासिक परेड के पीछे महीनों की कड़ी मेहनत छिपी है। अलग-अलग प्रजातियों के सैन्य जानवरों को एक साथ प्रशिक्षित करना, उन्हें एक लय में चलाना और राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना, यह आसान नहीं था। लेकिन कैप्टन हर्षिता और उनकी टीम ने इसे संभव कर दिखाया। यह पहला मौका है जब इतने विविध सैन्य जानवर एक साथ राष्ट्रीय स्तर की परेड में शामिल होंगे।
ये हैं सेना के मूक योद्धा, जिनकी कहानी बिना शब्दों के भी दमदार है
बाज जो दुश्मन के छोटे ड्रोन को आसमान में ही नाकाम कर देते हैं।
बैक्ट्रियन ऊंट, जो लद्दाख के माइनस तापमान वाले बर्फीले रेगिस्तानों में सेना की गश्त की रीढ़ हैं।
आर्मी डॉग्स, जो विस्फोटक खोजने से लेकर खोज-बचाव अभियानों तक, हर मोर्चे पर अचूक साबित होते हैं।
कर्तव्य पथ पर जब यह दस्ता गुजरेगा, तो तालियों के साथ-साथ देश का सिर भी गर्व से ऊंचा होगा। कैप्टन हर्षिता राघव का यह नेतृत्व सिर्फ एक परेड नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो वर्दी पहनकर देश की सेवा का सपना देखती हैं।







