देश की क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव सामने आया है। जो कंपनियां अब तक “10 मिनट में डिलीवरी” को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती थीं, वही अब इस दावे से पीछे हटती नजर आ रही हैं। ब्लिंकिट ने सबसे पहले अपने प्लेटफॉर्म से यह लाइन हटाई, और अब स्विगी, जोमैटो और जेप्टो भी इसी रास्ते पर चलने की तैयारी में हैं।
इस बदलाव की वजह सिर्फ बिजनेस रणनीति नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरी नाराज़गी और सरकार का सख्त रुख है। डिलीवरी बॉयज की हड़ताल ने उस हकीकत को सामने ला दिया, जिसमें समय की होड़ में उनकी जान जोखिम में पड़ रही थी। तेज डिलीवरी का दबाव, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लगातार बढ़ता तनाव ये सब अब सवालों के घेरे में हैं।
हाल ही में केंद्रीय श्रम मंत्री *मनसुख मांडविया ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के टॉप अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में साफ संदेश दिया गया बिजनेस मुनाफा इंसानी जान से ऊपर नहीं हो सकता।
सरकार ने माना कि 10 मिनट जैसी समय-सीमा न सिर्फ डिलीवरी राइडर्स के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर चल रहे हर नागरिक के लिए जोखिम पैदा करती है।
बैठक में तीन बड़े फैसले उभरे
पहला, कंपनियां अब ग्राहकों से किसी तय समय-सीमा का सार्वजनिक वादा नहीं करेंगी।
दूसरा, वर्कर्स की सुरक्षा को बिजनेस मॉडल का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
और तीसरा, सरकार गिग वर्कर्स के लिए **सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य स्थितियों को लेकर एक व्यापक नीति लाने की तैयारी कर रही है।
अब सवाल ये है—क्या तेज डिलीवरी का दौर खत्म हो रहा है, या ये सिर्फ एक नई, ज्यादा जिम्मेदार शुरुआत है?
एक बात तय है—अब रफ्तार से पहले जिंदगी को प्राथमिकता दी जाएगी।







