देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर से एक दर्दनाक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा मामला 43 वर्षीय अरविंद, पिता हीरालाल का है, जो कुलकर्णी भट्टा क्षेत्र का रहने वाला था। इससे पहले 21 से 31 दिसंबर के बीच 13 लोगों की जान जा चुकी थी।
घटना के बाद गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने 7 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये के मुआवजे के चेक सौंपे, लेकिन इस दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया जब गुस्साए परिजनों ने साफ शब्दों में कहा—
“हमें आपका चेक नहीं चाहिए, हमें जवाब चाहिए।”
📊 हालात भयावह, हजारों संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 7,992 घरों का सर्वे किया जा चुका है, जिसमें 2,456 लोग संक्रमित पाए गए हैं।
- 200 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
- करीब 40 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं
- 162 मरीजों का इलाज अभी अलग-अलग अस्पतालों में जारी है
⚖️ हाईकोर्ट की सख्ती
मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने जनहित याचिका पर सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि
➡️ सभी प्रभावितों का इलाज पूरी तरह मुफ्त कराया जाए।
🚨 मंत्री के सामने फूटा महिलाओं का गुस्सा
मंत्री विजयवर्गीय जब स्कूटर से इलाके में पहुंचे, तो स्थानीय महिलाओं ने खुलकर नाराजगी जताई। इस विरोध का वीडियो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
वीडियो में एक महिला कहती नजर आती है—
“पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा है। भाजपा पार्षद को बार-बार बताया, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ।”
❓ सवालों के घेरे में सिस्टम
स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौतों ने प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार जिम्मेदारी तय कर पीड़ितों को सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और जवाबदेही कब तक देती है।







