भारत समेत पूरी दुनिया की निगाहें इस समय होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच जल्द ही समझौता हो सकता है। अगर यह डील होती है, तो वैश्विक समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कर दिया है कि मौजूदा बातचीत केवल होर्मुज स्ट्रेट तक सीमित है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अलग स्तर की बातचीत होगी और अमेरिका का अंतिम उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। यानी समुद्री मार्ग पर सहमति बनने के बावजूद परमाणु विवाद अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बना रहेगा।
उधर, ईरान ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक अस्थायी और सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार करने पर चर्चा कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई व्यवस्था में स्ट्रेट में प्रवेश करने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण ईरान के पास रहेगा, जबकि बाहर निकलने वाले जहाजों को ओमान वैकल्पिक मार्ग से क्लियरेंस देगा। हालांकि, अंतिम मंजूरी से पहले ओमान हर जहाज की जानकारी ईरान के साथ साझा करेगा।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री यातायात का नया मॉडल देखने को मिल सकता है। ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता वास्तव में सफल हो पाता है, या फिर परमाणु विवाद आगे भी दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी बाधा बना रहेगा।







