शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले यूनिवर्सिटी कैंपस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले कुछ सिक्योरिटी गार्ड ही कथित तौर पर ड्रग्स सप्लाई करने के आरोपों में सामने आए हैं।
भोपाल की एक निजी यूनिवर्सिटी में हुई इस पड़ताल के दौरान एक सिक्योरिटी गार्ड ने कथित तौर पर रिपोर्टर से कहा, “जब भी माल चाहिए, यहीं आ जाना। मैं मोबाइल नहीं रखता और न ही मोबाइल पर कोई डील करता हूं।” यहां माल से मतलब स्मैक की पुड़िया बताया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि यूनिवर्सिटी कैंपस तक स्मैक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। आरोप है कि राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से ड्रग्स मध्य प्रदेश तक लाई जाती है और फिर छोटे-छोटे पैडलरों के जरिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास छात्रों तक पहुंचाई जाती है। इस पूरे नेटवर्क को बड़े ड्रग तस्करों द्वारा संचालित किए जाने की बात भी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राज्य सरकार 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान शुरू करने जा रही है, तब शिक्षा संस्थानों के भीतर इस तरह की गतिविधियां कैसे फल-फूल रही हैं। अभियान का उद्देश्य नशे के खिलाफ कार्रवाई और युवाओं को जागरूक करना है, लेकिन पड़ताल के दौरान कथित तौर पर पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आई।
अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और पुलिस इस पूरे नेटवर्क पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या शिक्षा संस्थानों को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सकेगा।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है।







