उज्जैन का चिंतामणि रिंग रोड। एक सड़क हादसा होता है और एक महिला स्वाति की मौत हो जाती है। पहली नजर में लगा कि ये सिर्फ एक दुर्घटना है, लेकिन कानून की आंखों में धूल झोंकना इतना आसान नहीं था। कैसे एक साधारण दिखने वाला एक्सीडेंट ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ निकला!
पुलिस के रडार पर आया मैजिक वाहन का ड्राइवर वाहिद। वो पांच दिन तक खुद को मासूम बताता रहा, लेकिन जब खाकी ने अपना रंग दिखाया, तो वाहिद की जुबान से सच उबल पड़ा। ये कोई इत्तेफाक नहीं था, ये ‘सुपारी किलिंग’ थी। वाहिद ने कबूल किया कि उसे स्वाति को कुचलने के पैसे दिए गए थे। साजिश की जड़ें चिंतामणि ब्रिज के उसी सन्नाटे में दफन थीं, जहाँ पांच मुजरिमों ने मिलकर मौत का ब्लूप्रिंट तैयार किया था।
योजना इतनी सटीक कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। स्वाति को बहाने से बुलाया गया, उसकी हर हरकत पर नजर रखी गई। जैसे ही स्वाति ऑटो से उतरी, मौत का काउंटडाउन शुरू हो गया। साजिश में शामिल उमा नाम की महिला ने फोन घुमाया “शिकार पहुंच चुका है!” ये सिर्फ एक कॉल नहीं थी, बल्कि स्वाति की जिंदगी खत्म करने का सिग्नल था।
हादसे की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी थी, लोकेशन कंफर्म थी और वाहिद का पैर एक्सीलेटर पर था। जिसे दुनिया ने एक्सीडेंट समझा, वो दरअसल रिश्तों और रुपयों के लालच में किया गया एक सुनियोजित कत्ल था। अब सवाल ये था कि आखिर स्वाति से ऐसी क्या दुश्मनी थी कि उसे रास्ते से हटाने के लिए पूरा गिरोह सक्रिय हो गया? सचाई अब परतों में बाहर आ रही थी!







