इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में एक जन्मदिन की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं जब दाल-बाफले की दावत लोगों के लिए जहर साबित हो गई। शुक्ला गली में आयोजित पार्टी में परोसा गया खाना मेहमानों की सेहत पर ऐसा कहर बनकर टूटा कि 30 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए।
रविवार सुबह जैसे ही लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई, इलाके में हड़कंप मच गया। किसी को चक्कर, किसी को तेज उल्टियां, तो कोई पेट दर्द से कराहता नजर आया। हालात ऐसे बन गए कि सभी को अलग-अलग क्लीनिकों में इलाज कराना पड़ा। गनीमत रही कि फिलहाल किसी को अस्पताल में भर्ती नहीं करना पड़ा, लेकिन सवाल ये ,है अगर हालत और बिगड़ जाती तो जिम्मेदार कौन होता?
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। भोजन के सैंपल जांच के लिए उठा लिए गए हैं। नगर निगम ने भी पानी के सैंपल भर लिए हैं। लेकिन ये वही इलाका है जहां पहले भी दूषित पानी बड़ा हादसा कर चुका है। तब भी कार्रवाई के दावे हुए थे, जांच बैठी थी, कागज भरे गए थे — और फिर सब शांत।
अब फिर वही कहानी दोहराई जा रही है। पहले लोग बीमार पड़ें, फिर सैंपल लिए जाएं, फिर रिपोर्ट का इंतजार हो, और आखिर में मामला ठंडा। आखिर कब तक भागीरथपुरा के लोग प्रशासन की लापरवाही की कीमत अपनी सेहत से चुकाते रहेंगे?
क्या खाद्य सामग्री खराब थी? क्या पानी दूषित था? या फिर निगरानी सिर्फ फाइलों तक सीमित है?
इस ताजा घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जिम्मेदार विभाग हादसे के बाद जागते हैं, पहले नहीं। सवाल सिर्फ 30 लोगों की तबीयत का नहीं है, सवाल सिस्टम की सेहत का है, जो बार-बार बीमार साबित हो रहा है।







