मध्यप्रदेश के सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक अंतर्गत कोरौली कला गांव की अतरैला पहाड़ी से एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज सामने आई है। यहां प्राचीन प्रोबोसिडियन कुल, यानी हाथियों के पूर्वजों से जुड़े जीवाश्म अवशेष मिलने का दावा किया गया है। पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सतना की वैज्ञानिक टीम द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षण में यह संकेत मिला है कि ये अवशेष लगभग 25 हजार से ढाई लाख वर्ष पुराने हो सकते हैं।
इस खोज को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि यदि यह पुष्टि होती है तो यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक जीवों के अध्ययन के लिए एक अहम स्थल बन सकता है। टीम ने जिला प्रशासन से इन अवशेषों को तत्काल संरक्षित करने और विस्तृत शोध कार्य शुरू करने की मांग की है।
दांत और अस्थि खंडों से मिले अहम संकेत, हाथी कुल के प्राचीन जीवों की ओर इशारा
प्राणी शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. हर्षित सोनी के नेतृत्व में डॉ. ऋषभ देव साकेत और पुरातत्वविद डॉ. धीरेंद्र शर्मा की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान वैज्ञानिकों को बड़े आकार के शाकाहारी स्तनधारी जीवों के दांतों के टुकड़े और कुछ अस्थि खंड प्राप्त हुए।
इन दांतों में एनामेल प्लेट, डेंटिन संरचना और घिसाव के स्पष्ट निशान पाए गए हैं, जो प्रारंभिक तौर पर प्रोबोसिडियन वर्ग के जीवों से मेल खाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये अवशेष प्राचीन हाथियों या उनके पूर्वजों के हो सकते हैं, जो इस क्षेत्र में हजारों साल पहले निवास करते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आगे के परीक्षणों में इस खोज की पुष्टि होती है, तो यह न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में प्रागैतिहासिक जीवों के अध्ययन को भी नई दिशा देगा।







