दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और सुचारु रूप से दोबारा खोलने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सुरक्षा, कूटनीतिक प्रयासों और समुद्री मार्गों की निगरानी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। कई प्रमुख वैश्विक शक्तियों की भागीदारी इस बैठक को और भी अहम बना रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को लेकर गंभीर है।
भारत की अहम भागीदारी: विदेश सचिव विक्रम मिसरी करेंगे प्रतिनिधित्व
इस अहम बैठक में भारत को भी आमंत्रित किया गया है, जहां देश का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिसरी करेंगे। भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा होता है। ऐसे में भारत की भागीदारी न केवल रणनीतिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में भारत अपनी संतुलित विदेश नीति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपने विचार रखेगा। साथ ही, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। यह बैठक आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।







