इन्दौर के सिमरोल थाना क्षेत्र के चोरल गांव से आई ये खबर सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों और खत्म होती संवेदनाओं की डरावनी कहानी है। सवाल ये है कि क्या अब जमीन का टुकड़ा इंसान की जान से ज्यादा कीमती हो गया है? या फिर खून के रिश्ते अब सिर्फ नाम के रह गए हैं?
मामला मामूली था मवेशी खेत में घुस गए। लेकिन गुस्सा इतना जहरीला निकला कि एक भतीजे ने अपनी ही नसों में दौड़ते खून को पहचानने से इंकार कर दिया। 46 वर्षीय सूरज कौशल, जो अपने खेत में मेहनत कर रहे थे, शायद ये नहीं जानते थे कि आज की बहस उनकी आखिरी बहस साबित होगी।
गाली-गलौज से शुरू हुआ विवाद अचानक हैवानियत में बदल गया। भतीजा अभिषेक और उसकी पत्नी पायल ने मिलकर सूरज पर हमला बोल दिया। धक्का दिया गया… और वो धक्का सीधे मौत की तरफ था। सूरज पास पड़े पत्थर पर गिरे सिर फूटा, ज़िंदगी बिखर गई।
अस्पताल ले जाया गया, उम्मीदें बची थीं… लेकिन कुछ जख्म सिर्फ शरीर को नहीं, किस्मत को भी तोड़ देते हैं। इलाज के दौरान सूरज ने दम तोड़ दिया—और एक मामूली झगड़ा अब हत्या बन गया। शुरुआत में पुलिस ने इसे साधारण मारपीट माना, लेकिन जैसे ही मौत हुई, सच्चाई ने अपना असली चेहरा दिखाया। अब हत्या का केस दर्ज हो चुका है।
लेकिन सवाल अभी भी जिंदा है क्या हम इतने गिर चुके हैं कि अपने ही खून के रिश्तों को पत्थर पर पटक दें? या फिर ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज में फैलती उस सोच का आईना है, जहां गुस्सा इंसान को जानवर से भी बदतर बना देता है?







